पुस्तक का परिचय और हिंदी पीडीएफ (Aurangzeb The Man And The Myth Hindi PDF)
यह भारतीय इतिहास के सबसे विवादास्पद दौर को एक नए नजरिए (Alternative Perspective) से देखने का मौका देती है।
औरंगज़ेब के समय के मंदिर विध्वंसों का ऐतिहासिक साक्ष्य? Share public link
नीचे इस पुस्तक के प्रमुख पहलुओं, औरंगजेब के शासनकाल और मिथकों का हिंदी में विस्तृत विश्लेषण दिया गया है। Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf
औरंगज़ेब के प्रशासन में बहुत से हिंदू उच्च पदों पर थे। 'औरंगजेब: द मैन एंड द मिथ' (औरंगजेब: सच्चाई और गल्प) में ट्रशके दिखाती हैं कि उनका शासन इतना सरल नहीं था जितना आमतौर पर बताया जाता है।
पुस्तक के मुख्य बिंदु (Key Highlights of the Book)
अकबर द्वारा समाप्त किए गए जज़िया कर को औरंगजेब ने अपने शासनकाल के उत्तरार्ध में दोबारा लागू किया। इसका मुख्य कारण दक्षिण के युद्धों के कारण खाली हुआ शाही खजाना और रूढ़िवादी उलेमाओं का समर्थन हासिल करना था। Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf
दूसरी ओर, पुस्तक की काफी आलोचना भी हुई है। कुछ आलोचकों ने इसे औरंगजेब के अत्याचारों को 'व्हाइटवॉश' (whitewash) करने का प्रयास बताया है। उनका आरोप है कि त्रस्चके ने यह साबित करने के लिए तथ्यों का चयन किया है कि वह हिंदू-द्वेषी कट्टरपंथी नहीं था, जबकि उसने 'जज़िया' कर जैसे धार्मिक रूप से भेदभावपूर्ण कानूनों को फिर से लागू किया और अपने विरोधियों के साथ क्रूरता का व्यवहार किया। कुछ का यह भी तर्क है कि पुस्तक अतीत के ऐतिहासिक अभिलेखों की गंभीर जांच पद्धति में कमी रखती है। यह पुस्तक, अपने संक्षिप्त आकार के बावजूद, भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहासलेखन में एक महत्वपूर्ण योगदान बनी हुई है।
औरंगज़ेब ने हिंदुओं को प्रशासन और सेना से पूरी तरह बाहर कर दिया था।
औरंगज़ेब ने उन मंदिरों को नष्ट किया जो विद्रोही हिंदू राजाओं से जुड़े थे या राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा माने जाते थे। Aurangzeb The Man And The Myth In Hindi Pdf
औरंगज़ेब और शिवाजी के संबंधों के बारे में?
ऑड्रे ट्रुश्के की हिंदी पाठक वर्ग के लिए मुगल इतिहास को एक नए परिप्रेक्ष्य से समझने का एक बेहतरीन अवसर है। यदि आप औरंगजेब के बारे में प्रचलित धारणाओं से परे जाकर तथ्यों को जानना चाहते हैं, तो यह किताब अनिवार्य है।
ट्रश्के के अनुसार, ऐतिहासिक रिकॉर्ड में केवल 100 से अधिक मंदिर तोड़ने के उल्लेख मिलते हैं, जबकि उसके 49 साल के शासन में हजारों मंदिर खड़े थे। उसने उदयपुर, बनारस और अन्य जगहों के मंदिरों को संरक्षण भी दिया।